नदियां पर्वत से निकल कर मैदानों में बहती हैं
मुझे पता है बीच में कहां ये ठहरती हैं
कौन पी जाता है नदियों का पानी?
कौन निगल जाता है चढ़ती जवानी?
मुझे पता है क्यों असुरक्षित है हमारी राजधानी
मुझे माता है वोट हमारे कहां जाते हैं
देकर सही आदमी को वोट क्यों हम हार जाते हैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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