आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरा गांव देखो

                
                                                         
                            हमारे गांव की सुंदरता देखो
                                                                 
                            
हमारी संस्कृति की सुंदरता देखो
गांव का सुबह-शाम देखो
गांव में मेरा नाम देखो
वातावरण सुंदर सुहानी देखो
गांव की जिंदगानी देखो
चितकबरी गाय देखो
चितकबरी नील गाय देखो
है कितना सुंदर मेरा गांव देखो
मेरे गांव के पीपल का छांव देखो
आम और अमरुद का उद्यान देखो
मेरे गांव के आम के बागान देखो
है बसा बैरिया बलिया में गांव मेरा
है गुदरी सिंह के टोला गांव मेरा
मेरे गांव का ईमान देखो
मेरे गांव में हिंदुस्तान देखो
मेरे गांव में मेरा मकान देखो
मेरे गांव के खेत खलिहान देखो
मेरे गांव में रहते हैं भगवान देखो
मेरे गांव में भगवती माई हैं
मेरे गांव में निमिया माई हैं
मेरे गांव में मेरे भाई हैं
मेरे चाचा बाबा और माई हैं
मेरा गांव पुर्वजों की कमाई है
मेरे गांव में ज्ञान की रोशनी आई है।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर