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मैं उसी माटी महान से हूं

                
                                                         
                            जहां की माटी सोना चांदी हीरा उगले
                                                                 
                            
जहां की माटी में सारे संसार का प्यार पले
जहां की माटी में सादगी सेवा का भाव पले
जहां की माटी में संत, महात्मा के भाव पले
जहां से मंगल पांडे, शिवा जैसे वीर निकले
उस माटी का सपूत मैं हार मानूंगा नहीं
चाहे झुक जाए अंबर और यह मही
उस माटी का रंग अभी तक लाल लाल है
जहां के वीर युद्ध भूमि में करते कमाल हैं
जहां से छत्रसाल हैं,जहां से जय प्रकाश से लाल हैं
हां वही बिहार,वही बिहार
है जो जग का कंठाहार
मैं उसी हिंदुस्तान से हूं
मैं उसी माटी महान से हूं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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3 घंटे पहले

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