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मदद से सजती है खेती बारी

                
                                                         
                            कोई किसी का सहयोग नहीं करेगा
                                                                 
                            
तो समाज हमारा कभी नहीं बढ़ेगा
बिना मदद के कोई कहीं नहीं टिकेगा
बिना मदद के कोई कुछ भी नहीं सिखेगा
मदद पर चलती है दुनिया सारी
बिना मदद के नहीं फूलती फुलवारी
मदद से सजती है खेती बारी।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
51 मिनट पहले

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