पेड़ पौधे हैं धरती मां का श्रृंगार
हरे भरे लहलहाते खेत हैं श्रृंगार
नदी नाले तालाब समंदर हैं श्रृंगार
ऊंचे ऊंचे पर्वत पठार
हैं ये ईश्वर का प्यार
हैं ये हमारे हिंदुस्तान का श्रृंगार
और पेड़ लगा कर, करो श्रृंगार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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