खड़ा हूं मैं सीना ताने
मेरी शक्ति ऊपर वाला जाने
लेकर कलम हाथ में
लेकर साहस साथ में
लेकर तिरंगा हाथ में
चल दिया हूं मैं जवान
बागी बलिया वाला
मैं वीर बलवान
बागी बैरिया से
मैं साहसी नौजवान
वीरों की धरा से
मैं मेट दूंगा
मैं भेंट दूंगा
हो जाएंगे चकनाचूर जो टकराएंगे
हो जाएंगे मजबूत जो हाथ बढ़ाएंगे।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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