हरियाली को निगल गए ये शहर सारे
हरे भरे लहलहाते खेत पेड़ प्यारे प्यारे
कट गए मेरे हृदय जैसे पेड़ पौधे न्यारे न्यारे
कट गए,बंट गए प्यारे प्यारे तरूवर हमारे।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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