किसी के कलम को कम मत समझना
किसी के कर्मठता को कम मत समझना
किसी के चूप्पी को लाचारी मत समझना
हर औरत को बेचारी मत समझना
कलम में तलवार से तेज धार है
कर्मठता से चलता संसार है
चूप रह कर ही होते कर्म महान हैं
हर औरत में छुपी मां महान है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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