कवियों! कलम की नोंक को जगाओ
कवियों! पैसे पर मत बिक जाओ
खुद को स्वच्छंद करो
खुद को मत बंद करो
सरकारें तो आएंगी
और जाएंगी
पर कविताएं तो अमर रहेंगी
यदि सच सच कलम कहेगी
नहीं सच लिखोगे
तो भविष्य में नहीं तुम दिखोगे
कवियों! कलम में धार लाओ
साहस से, संकल्प से सत्य उकेर कर जाओ।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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