जी लेने दो शान से
जी लेने दो स्वाभिमान से
जी लेने दो आन बान से
लड़ लेने दो तूफ़ान से
बतियाने दो आसमान से।
- सहज
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X