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जय मां दुर्गे!

                
                                                         
                            जो भय हरती हैं
                                                                 
                            
जो दुःख हरती हैं
जो बांधा हरती हैं
जो कृपा करती हैं
जो सुख देती हैं
जो खुशी देती हैं
जो आदि अनादि हैं
जो अविचल अविनाशी हैं
जो आनन्द की राशि हैं
जो अविकारी हैं
जो पाप हारी हैं
जो कलाधारी हैं
जो संहारकारी हैं
जो ब्राह्मणी हैं
जो रुद्राणी हैं
जो जग माता हैं
उनके चरणों में सहज सर झुकाता है
ओ चार भुजा वाली!
ओ अंबे कर मेरी रखवाली।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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53 मिनट पहले

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