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जय जय बिहार

                
                                                         
                            जय जय बिहार
                                                                 
                            
जय जय बिहार
जहां बुद्ध किए विहार
जो माना कभी नहीं हार
जिसको हैं चुनौतियां स्वीकार
जहां खिले पुष्प कचनार
जहां मिले सच्चा प्यार
जहां खिले पुष्प हजार
जहां के नस नस में बहे साहस की धार
जहां बहे गंगा यमुना सोन सरयू की धार
जहां बहे बागमती बुढ़ी गंडक की धार
जहां के लोग करते हैं चमत्कार
जहां की माटी में है प्यार
जहां की माटी से निकले स्वर्ण कंचन अपार
जहां हल जोतते मिली मां जानकी है वह बिहार
जहां की माटी में बसता स्वदेश प्यार
जहां की माटी उगले राष्ट्रपति और नेता हजार
जहां की सड़कें बिजली में किए सुधार नीतीश कुमार
जहां जन्में नेता हजार
जहां से निकले क्रांतिकारी हजार
जहां की माटी में में है हिंदुस्तानी प्यार
जहां हैं सहज कुमार जैसे रचनाकार
जहां बसते हैं बड़े बड़े साहित्यकार
जहां की माटी में है बहार
जहां हैं पटना मुजफ्फरपुर गया जैसे शहर हजार
है जो जग का कंठहार
जय जय बिहार
जय जय बिहार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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3 घंटे पहले

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