आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जहां की मिट्टी में आग है

                
                                                         
                            मैं उस मिट्टी से हूं
                                                                 
                            
जहां आग है
जहां तप त्याग है
मैं उस मिट्टी से हूं
जहां मंगल पांडे का घर है
मैं उस मिट्टी से हूं
जहां चित्तु पांडे का घर है
मैं उस मिट्टी से हूं
जहां के लोगों के पास नहीं डर है
मैं हूं वीर,यह मेरी मिट्टी का असर है
मैं उस मिट्टी से हूं
जहां हुआ महा समर है
इस मिट्टी को मेरा सलाम है
इस मिट्टी को मेरा प्रणाम है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर