बन कर पवन का झोंका ईश्वर आते हैं
मेरे दरवाजे को खटखटाते हैं
मैं दरवाजे तक जाता हूं
"हवा है "कह कर अंदर आता हूं
पानी पवन माटी अंबर और अनल ही हैं
ईश्वर मैं समझ नहीं पाता हूं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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