हम्मर मगध
हम्मर पहचान
हम्मर मगध
में छुपे हैं भगवान
हम्मर माटी मगध की
हम्मर संस्कृति मगध की
भरे नित नव उड़ान
भरे नित ऊंची उड़ान
है हम्मर माटी में शक्ति अपार
है हम्मर विरासत में छुपल सारा संसार
जहां जगह जगह होए सांस्कृतिक सेमिनार
जहां के रग रग में है हम्मर संस्कार
उस माटी से है हम्मर अमर प्यार
जहां से निकले बड़े नित कवि कलाकार
जहां से निकले बड़े बड़े साहित्यकार
उस माटी को मेरा नमस्कार
कहते उसे गयाजी
एक बार आप आइये ना जी
भूल जाएंगे जहान
भूल जाएंगे आसमान
जिस माटी ने बुद्ध को दिया ज्ञान
है वही हम्मर नगरी
स्वर्ग से सुंदर नगरी
जेकर नमवा फैलल बा सगरी
आव तू हूं भर ल अप्पन ज्ञान के गगरी
ह ई साहित्यिक नगरी
ह ई सांस्कृतिक नगरी
जहां ज्ञान छलकत जाये
उ नगरी गया कहाये
जहां सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' के ज्ञान गूंजे
जहां की माटी को दुनिया पूजे
है वह प्यारा
गया जी हमारा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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