आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गुरु गोरखनाथ की नगरी

                
                                                         
                            शिक्षा की नगरी
                                                                 
                            
गुरु गोरखनाथ की नगरी
है गोरखपुर नगरी
राप्ती नदी के तीरे तीरे
आईए जरा धीरे धीरे
है गोरखपुर विश्वविद्यालय जहां
है गोरखपुर पुर जंक्शन जहां
है पूर्वांचल की शान
जिसे जाने जहान
जिसे जाने हिंदुस्तान
है दिग्विजय नाथ महाविद्यालय जहां
है महाराणा प्रताप महाविद्यालय जहां
हैं चेतक पर सवार राणा प्रताप जहां
है नेपाल के लिए बड़ा बाजार जहां
है बड़ा हवाई अड्डा जहां
आईए गोरखपुर घूम लीजिए
आईए इसको चूम लीजिए
आम अमरूद का भंडार है
सब बाबा गोरखनाथ का प्यार है
इसमें छुपी शक्ति अपार है
यहीं पढ़ा मैं
यहीं बढ़ा मैं
जीवन की चढ़ाइयां चढ़ा मैं
यहां गोलघर है
यह शहर अमर है
प्रेमचंद की कर्म स्थली यही है
फिराक की जन्मस्थली यही है
गूंजे सहज कुमार के स्वर
यहीं आकाशवाणी से प्रखर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
35 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर