आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गोरखपुर और सहज कुमार

                
                                                         
                            उत्तर प्रदेश का नामी शहर गोरखपुर
                                                                 
                            
ठीक रेलवे स्टेशन के सामने विश्व विद्यालय गोरखपुर
गुरु गोरखनाथ के नगरी है गोरखपुर
राप्ती नदी के किनारे बसा है गोरखपुर
चमचम चमके दमके हमारा गोरखपुर
१९९० से १९९४ तक रहा मैं गोरखपुर
एम.ए. अंग्रेजी में,बी.एड.एल.टी.किया मैं
ब्रिज कोर्स किया मैं
इसी पावन शहर से
गोरखपुर नगर से
गोरखपुर विश्वविद्यालय में पढ़ा मैं
कैसे कैसे पढ़ पढ़ा के बढ़ा मैं
फुटपाथ पर खा के पढ़ा मैं
खुद को तपा के खुद को गढ़ा मैं
बना प्राध्यापक अंग्रेजी का,पढ़ाया,पढ़ा मैं
रेडियो स्टेशन से कविता पढ़ा मैं
पचहत्तर रूपया पाकर पढ़ा मैं
कैसे कैसे आगे बढ़ा मैं
कवि सहज कुमार बना मैं
कैसे कैसे तना मैं?
क्या क्या बताऊं?
क्या क्या गिनाऊं?
संघर्ष करके बढ़ा मैं
पढ़ा मैं, सपना सुंदर सुंदर गढ़ा मैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
18 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर