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दूध के धुले हुए

                
                                                         
                            लोग ये छल कपट से भरे हुए हैं
                                                                 
                            
लोग ये इर्ष्या द्वेष से भरे हुए हैं
ये आतंकवाद में पले हुए हैं
हम सब इनसे छले हुए हैं
कौन हैं जो यहां दूध के धुले हुए हैं?
सभी अहंकार में फूले हुए हैं
अपनी संस्कृति को ये भूले हुए हैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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24 मिनट पहले

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