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धर्म का मर्म

                
                                                         
                            हिंदू समझता मेरा धर्म बड़ा
                                                                 
                            
मुस्लिम समझता मेरा धर्म बड़ा
सिक्ख समझता मेरा धर्म बड़ा
जबकि है वही बड़ा
है जिसका बड़ा विचार
जिसका अच्छा व्यवहार
है जिसका बड़ा कर्म
है उसका बड़ा धर्म
सेवा भाव है धर्म का मर्म।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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3 घंटे पहले

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