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किसी का टूटा फूटा सा सुंदर मकान

                
                                                         
                            १९९० की है एक बहुत अच्छी बात
                                                                 
                            
हुई धनबाद शहर से मेरी मुलाकात
मैं केंद्रीय विद्यालय में नौकरी पाया
पढ़ाने के लिए मैं धनबाद आया
मुझसे पहले पहुंचा वहां मेरा गांव
मुझसे पहले पहुंचा वहां मेरा छांव
ओल्ड डी वीएस बिल्डिंग आलिशान
मेरी पहली नौकरी मैं था जवान
२१ साल का लंबा कद का जवान
पानी के लिए लंबी कतार देखा
धनबाद शहर का बड़ा इंतजार देखा
धनबाद शहर का बड़ा प्यार देखा
मेरे गांव के लोग वहां करते थे ठेकेदारी
किसी की नौकरी पक्की सरकारी
किसी को मिला शहर की चौकीदारी
किसी का धन सच्चाई और ईमानदारी
कोई झूठा,छलिया दिखाए मक्कारी
देखा वहां बागी बलिया की हिस्सेदारी
किसी की ईमारत ऊंची आलीशान
किसी का टूटा फूटा सा सुंदर मकान
बच्चे बड़े बड़े बदमाश
रखते थे नंबर की आस
मैं पढ़ा कर मिटाता प्यास
मैं धनबाद में आया
कुछ नाम,कुछ दाम कमाया
शहर लगा अच्छा और सुंदर
लोग मिले मिलनसार और सुंदर
शहर धनबाद को भूलाऊं भला कैसे?
सोच रहा हूं मैं शहर दुबारा जाऊं कैसे?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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19 मिनट पहले

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