चम चम चमके हमार गऊंवा
लीलार पर भारत के बिंदी जैसे दमके हमार गऊंवा
गंगा नदी के पनिया लहर लहर लहराए
बाढ़ हर साल आए
पर हम नहीं घबराएं
गंगा मईया के चरनियां दुआरवा तक आए
बच्चा बुतरू सब नहाए
जवनकन छलांग लगाए
बुढ़वन के मन हहराए
लईकन के मजा आए
डूबे पलानिया
आए पलटनिया
हेलिकॉप्टरवा देख के मनवा हरषाए
हमर गुदरी सिंह के टोलवा दहाए
केहू डूबे केहू उतराए
पर बड़ा मजा आए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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