छलक रहा है स्वदेश प्यार
छलक रहा है संसार प्यार
छलक रहा है पावन प्यार
छलक रहा है मानव प्यार
चाहता हूं कर लूं प्यार
लिख दूं प्यार प्यार
और केवल प्यार।
- सत्येंद्र कुमार सिंह 'सहज'
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