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अपनी माटी के लिए

                
                                                         
                            जिस माटी में जन्म लिए
                                                                 
                            
जिस माटी से शिक्षा लिए
जहां बड़े हुए
जहां खड़े हुए
उस माटी का कर्ज चुकाना बाकी है
उस माटी के लिए कुछ दीए जलाना बाकी है
उस माटी के लिए चाहता हूं मैं देना बड़ा बलिदान
उस माटी के लिए है क्या मेरा योगदान?
चाहता हूं करूं सर्वस्व दान
चाहता हूं विकसित हिंदुस्तान बनाऊं
चाहता हूं मैं और जवान लाऊं
सबमें एकता लाकर विकास की धार बहाऊं
चाहता हूं मैं भेदभाव मिटाऊं
चाहता हूं मैं जातिवाद हटाऊं
समानता, मानवता मैं लाऊं
शिक्षा की अलख जगाऊं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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3 घंटे पहले

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