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अहंकार नहीं टिकता है

                
                                                         
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अहंकार जब दिखता है
इंसान कुछ नहीं सीखता है
किसी को है पैसे का अहंकार
किसी को है पद का अहंकार
किसी को है सुंदरता का अहंकार
पैसा,पद, सुंदरता सब चला जाएगा
समय के हाथों सब छला जाएगा
तो भी मूर्ख पालते हैं अहंकार
जबकि नम्रता से आता है धन अपार
मान, सम्मान और सुख अपार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
58 मिनट पहले

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