दरवाजे सारे बंद कभी होते ही नहीं है
एक बंद होता है तो दूसरे खुलते वहीं हैं
इसीलिए हमें कभी निराश होना नहीं है
हमें कभी धीरज खोना नहीं है
हमें कर्त्तव्य निरंतर करते जाना है
हमें निरंतर सफल होते जाना है
आशा और विश्वास से सब पाते जाना है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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