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नये नये सपने गढ़ो।

                
                                                         
                            दुख आएगा
                                                                 
                            
दुख जाएगा
दुःख से आगे बढ़ो
नये नये सपने गढ़ो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
16 घंटे पहले

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