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बिस्तरों पर मत बिछाओ साजिशें।

                
                                                         
                            बिस्तरों पर मत बिछाओ साजिशें।
                                                                 
                            
राज़ सारे खोल देंगी.... सिलवटें।।

अब कहां लश्कर में ऐसे... लोग हैं।
मोर्चे पर जो सदाक़त के...... डटें।।

दोस्तों की इख़तलाफ़ी..... खाइयां।
इतनी गहरी हैं कि शायद ही.. पटें।।

शोर है ख़ामोशियों में... किस क़दर।
किस क़दर ख़ामोश हैं ये... आहटें।।

ऐसा झोंका अब कोई आये.. हसन।
अब्र नफ़रत के जो छाये हैं... छटें।।
-अंजुम अल हसन
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29 मिनट पहले

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