आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दो पल का ग़म

                
                                                         
                            यूँ याद आ रही हर पल
                                                                 
                            
बस दो पल का ग़म।
आज का दिन कोई बड़ा नहीं है
पर जन्म दिवस हमारा है ।
तुम गये हो यूँ छोड़
जैसे कोई मालिक बगियाँ छोड़ ।
जहाँ खिला करते थे रंग बिरंगे फूल
आज वहाँ रह गये मुरझायें फूल ।
तुम्हारे जाने का मलाल तो नहीं
बस दो पल, याद सताती है ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर