कौन हैं ये बुद्धिजीवी ?
क्या इनकी विशिष्ट होती है चाल ?
है मेरी समझ से बहुत परे,
ये उलझे हुए शब्द जाल ।
है संभव मैं अयोग्य ,अबोध
या फिर मेरी बुद्धी छोटी,
पर इतना मुझसे लिखवा लो
खाते होंगे वो भी रोटी ।
कोई छोटी या बड़ी कोई
चाहे जो आकार रहे ,
आटा ही जिसका मूल तत्व
पानी ही जिसका सार रहे ।
कौन हैं ये बुद्धिजीवी ?
झोंपड़पट्टी की समस्या ,
जिनके चिंतन का विषय
विचार करें,विमर्श करें,
प्रकट करें जब तब संशय
कार इन्हीं की गुज़रे ,
झोंपडपट्टी की गलियों से,
खिड़कियों के काँच चढ़ा लें,
ओझल हो जाएँ ,तीव्र गति से ।
क्या ये ही हैं बुद्धिजीवी ?
क्या वही हैं बुद्धिजीवी ?
नारी मुक्ति के जो हैं अगवा ,
कहें देवी और मानें दुर्गा ,
भाषण दें,सर झटकें,
पर अपनें घर की देवी को,
उठा,ज़मीं पर जब तब पटकें ।
क्या यही हैं बुद्धिजीवी ?
या फिर वो कवि ,
जो करते हैं कविताओं से राष्ट्र जागरण,
पर स्वयं नहीं करते,
एक पंक्ति का भी अनुसरण ।
क्या यही हैं बुद्धिजीवी ?
प्रचार करते ,प्रसार करते,
हिन्दी का उद्धार करते,
पर दैनिक जीवन में अपनें,
अंग्रेज़ी का जाप करते ।
यही है बुद्धिजीवियों की तस्वीर ,
तो बनना होगा अब गंभीर,
मुखौटों के बाज़ार को नष्ट करना होगा,
अन्यथा दब जाएगी सच्चाई ,
नक़ली चेहरों तले,
सिर उठा लेगी बुराई,
लुप्त हो जाएँगे लोग भले
लुप्त हो जाएँगे लोग भले ।
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