हर बात की एक हद हो
तो वो प्यारी लगती है
जो सीमा पार हो जाए
बहुत बेचारी लगती है।
चाहत हो या अपनापन हो
हर बंधन की एक ही सीमा
हद से ज़्यादा मीठापन भी
छीन लेता जीने की गरिमा।
शब्दों का समंदर उमड़े
जो हर पल बहता जाए
बिन पूछे कहीं भी कोई
ढेरों किस्से कहता जाए।
अनचाही इस बाढ़ से हर दिल
सुकून के एक पल को तरसे
अति का यह शोर थमे तो
फिर अमन का बादल बरसे।
धन हो या फिर ज्ञान हो भाई
अहंकार में जो ढल जाए
अति का वह भारी बवंडर
सब कुछ पल में निगल जाए।
अति हर चीज़ की बुरी होती है
बिना फल के तीखी छुरी होती है।
समझदार को बस एक इशारा
हर सीख जीवन की धुरी होती है।
-अनिता दासानी,'अदा'
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