नंद-भवन आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की।
द्वार-द्वार मंगल-धुनि बाजै,
जय हो नंदलाल की॥
मोर-मुकुट सिर ऊपर सोहै,
नैनन छवि अति प्यारी।
अधरन धरी मधुर मुरलिया,
मुसकैं छवि बलिहारी॥
पीताम्बर तन पर लहरै,
कंठ विराजै माला।
चरणन नूपुर रुनझुन बाजैं,
रूप अनूप निराला॥
श्याम सलोने साँवरे मोहन,
मुख पर चंदन-रेखा।
एक झलक पावत ही मन ने
अपना भाग्य सरेखा॥
कानन कुण्डल झिलमिल करैं,
कुंतल घुँघराले।
बाल-रूप की छवि पर मोहन,
देव सकल बलिहारे॥
यशोदा के राज-दुलारे,
नंदबाबा के लाल।
तेरी छवि पर वारूँ मोहन,
तन-मन-जीवन सारा॥
माखन-मिश्री अति प्रिय मोहन,
ग्वालन संग लुटावै।
कबहुँ मटकी फोड़ि हँसै तू,
कबहुँ मैया से लजावै॥
गोकुल की गलियन में कान्हा,
नित नई धूम मचावै।
तेरी मधुर मुरलिया सुनि के,
मन हरषै, दुख जावै॥
दीन-दुखी के तुम रखवारे,
भक्तन के प्रतिपाला।
जिस पर करुणा-दृष्टि तुम्हारी,
उसका तू रखवाला॥
हे नंदलाला! दीन-दयाला,
चरणन शरण लगायो।
तन-मन-धन सब अर्पण करि के,
अपनो दास बनायो॥
राधा के मनमोहन प्यारे,
भक्तन के रखवारे।
‘मनस्वरा’ के हृदय-कुंज में,
बसियो श्याम हमारे॥
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