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जीवन बहुत छोटा है उसे व्यर्थ जाने दें

                
                                                         
                            जीवन बहुत छोटा है उसे व्यर्थ न जानें दें
                                                                 
                            

जीवन बहुत छोटा है,
इसे व्यर्थ न जाने दें,
जो पल मिला है साँसों का,
यूँ ही न बीत जाने दें।

कल की चिंता में आज न खोएँ,
बीते कल का बोझ न ढोएँ,
जो कहना है, आज कहें हम,
मन में बात न रहने दें।

कुछ सपने आँखों में पालें,
कुछ सपनों को सच कर डालें,
राह कठिन हो, कदम बढ़ाएँ,
हौसलों को थकने न दें।

किसी अधर पर हँसी खिला दें,
किसी नयन का दर्द मिटा दें,
किसी अकेले मन के आँगन
अपनेपन का दीप जला दें।

रिश्ते अनमोल मिले हैं हमको,
इनकी कद्र सदा करते जाएँ,
रूठे मन को पास बुलाकर
दूरियाँ फिर न रहने दें।

धन-दौलत सब यहीं रहेंगे,
साँसों का भी अंत होगा,
पीछे केवल कर्म बचेंगे,
प्रेम ही अपना संतोष होगा।

जब तक जीवन शेष है मन में,
जीने का उत्सव होने दें,
जीवन बहुत छोटा है—
इसे व्यर्थ न जाने दें।

-अनिता चतुर्वेदी 'मनस्वरा'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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