मेरे अंजाम कोई देख न लेना,
कोई देखकर मुँह न मोड़ लेना इस महफ़िल में।
मुझ पर कोई इल्ज़ाम न देना,
जताना तो बहुत आसान है।
पर बदलती हवाओं पर मेरा नाम न लिख देना,
सोचकर मुझसे पूछ लेना,
अगर कोई गलती हो जाए।
मेरी फ़रियाद इतनी ही है,
कि कोई तुम्हारा हिसाब न कर दे।
- अनिल शाह
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