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हौसले आ आकर जाते भी रहे यादें आती रहीं,भुलाने से

                
                                                         
                            एक नजर कर के चले जाने से
                                                                 
                            
हम क्यों होते रहे दीवाने से
यह कि बस तुमको याद करते रहे
जान कर कभी,कभी अनजाने से
पास आओगे तो जल जाओगे
कब शम्मा ने कहा परवाने से
वो संजीदगी थी,तकल्लुफ तो नहीं
बाज आते थे मुस्कुराने से
फर्क शायद उसे नहीं पड़ता
मेरी दुनिया के उजड़ जाने से
हम थे नादां हमें नहीं आया
बात करना किसी बहाने से
हौसले आ आकर जाते भी रहे
यादें आती रहीं,भुलाने से
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8 मिनट पहले

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