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जला रखे थे हमने कुछ चिराग उल्फ़त के

                
                                                         
                            मैं धूल भी नहीं बिना तुम्हारी रहमत के
                                                                 
                            
शुरू हुए हैं इम्तिहान मेरी हिम्मत के
पलक झपकने का भी कोई सबब होता है
एक तिनका भी नहीं है बिना जरूरत के
मेरी आवारगी कहां पे ले आई है मुझे
गुनाह होने लगे कई बगैर लज्जत के
मेरे वजूद पर सवाल हुए जाते हैं
मेरे चेहरे पे बहुत हैं निशान गुरबत के
ये जिंदगी जहां जहां भी लिए जाती है
चला जाता हूं मैं बगैर किसी हुज्जत के
मेरी तकदीर की कहानी मुझे लिखनी थी
मैं देखता रहा चुपचाप खेल किस्मत के
ये आंधियों के कारवां वहीं से गुजरे थे
जला रखे थे हमने कुछ चिराग उल्फ़त के
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59 मिनट पहले

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