जश्ने बहार होकर आया
मैं सभी ग़म खोकर आया
अभी कहीं खो गया हूं मैं
किस गली से होकर आया
आंसू खुद ही पोंछने पड़े
फिर कभी न राे कर आया
अक्स मेरा निखरा भी नहीं
कई दफा आईना धोकर आया
दरिया हैरत से तकता है मुझे, मैं
भँवर में खुद कश्ती डुबोकर आया
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