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इतने कमाल से

                
                                                         
                            कितने खयाल आये तुम्हारे ख्याल से
                                                                 
                            
कितने सवाल आते रहे इक सवाल से
दिल मैने दुखाया था भूले से किसी का
फिर आज तक निकल नहीं पाया मलाल से
कितने गुलाबों ने तो खुदकुशी ही कर लिया
खुशबू वो आ रही थी तुम्हारे रूमाल से
मंजिल नहीं है है कोई गुमनाम ठिकाना
तुम क्यों हुए जाते हो अभी से निहाल से
कुछ भी समझ न आया, देखता ही रह गया
वह मुझसे मुखातिब हुआ इतने कमाल से
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5 महीने पहले

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