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चांद आसमान पर उतरता है

                
                                                         
                            दिल मेरा जिसको प्यार करता है
                                                                 
                            
दिल की बातें कहां समझता है
उसे छुपकर के भी देखना था हमे
वो जो पर्दा ही नहीं करता है
ये सुना है चले जाने पे मेरे
चांद आसमान पर उतरता है
किसी कश्ती के डूब जाने पर
क्या ये दरिया भी सोग करता है
वो जो मरना तो चाहता ही नहीं
और जीने से बहुत डरता है
फूंक फूंक कर यूं पांव रखता हूं
जख्म पांवों का और जलता है
बातें करता हूं बहकी बहकी सी
मन सम्हाले नहीं संभलता है
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3 घंटे पहले

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