पहली बारिश बरस रही है
मिट्टी सोंधी महक रही है
गाँव की उजली पगडंडी सी
बिजली नभ में चमक रही है
अर्ध्य दिया जाता हो, बूँदें
पत्तों से से यूं टपक रही हैं
सबसे ज्यादा खुश किसान हैं
खेत, क्यारियां सरस रही हैं
फिर बादल तुम लौट के आना
अभी हवा भी उमस भरी है
घोसले में कुछ हो या ना हो
फिर भी चिड़िया चहक रही है
तुम भी आ जाते सावन में
मेरी नजरें तरस रही हैं
हरयाली की साड़ी पहने
धरती कैसी निखर रही है
कश्ती अंगड़ाई लेती है
दरिया बाहें खोल रही है
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