मुझसे पर्दादारी थी
बाकी सबसे यारी थी
मरना था मंजूर नहीं
जीने में दुश्वारी थी
हर वो इन्सां तन्हा था
जिसमें कुछ खुद्दारी थी
कोई इसकी दवा करो
इश्क बड़ी बीमारी थी
क्या कुछ छोड़ दिया मैने
जीने की तैयारी थी
मैं खुद अपने साथ नहीं
तुझ संग दुनिया सारी थी
जीवन के खेल में भी
कितनी मारा मारी थी
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