तेरी इतनी इनायत हो रही है
मेरी कितनी शिकायत हो रही है
नहीं करता है जी तुम पर करूँ शक
बहुत मुझसे शराफत हो रही है
उदास हो जाना मेरा शगल था
मगर हंसने की आदत हो रही है
खुशी का जाम छलका जा रहा है
खराब मेरी हालत हो रही है
खनक आवाज में, पुरनूर सूरत
कयामत पे कयामत हो रही है
कभी आएंगे ये नुस्खे अमल में
अभी खलिश कवायद हो रही है
हमें माफिक नहीं हो तो हटो तुम
किराए की बगावत हो रही है
रुंधी आवाज कोई आ रही है
कोई पूजा, ईबादत हो रही है
शिकायत उससे है लेकिन है मेरा
पुरानी ये रवायत हो रही है
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