मैं सबसे दूर रहा,सबसे किनारा करके
और तुम आए नहीं आने का वादा करके
कोई तिलिस्म, इस शहर में खींच लाता है
मैं लौट आता हूं जाने का इरादा करके
वो बेरहम है ऐसा नहीं लगता है, मगर
दवा देता है वो कुछ दर्द को ज्यादा करके
नाराज जिंदगी से मैं नहीं रह पाता हूं
हंसा देती है वो रोने को आमादा करके
हुईं हैं इस कदर रंगों से नफरतें उनको
हरेक तस्वीर देखा करते हैं सादा करके
तमाम उम्र मुझे भूल नहीं सकता है
मैंने ठुकराया भी उसको है मवादा करके ,
जमीन बांटने पर तुल गया वही भाई
बचपने में बांटता था रोटियां आधा करके
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X