कैसे तुम्हारे दिल में बसेरा भी कर लिया
मुझको मिली थी रात सवेरा भी कर लिया
जो भीड़ में हंसता था सबके साथ साथ में
देखा मुझे तो खुद को अकेला भी कर लिया
हम इश्क के मुरीद नहीं थे,शरीफ थे
तुमसा कोई मिला,ये झमेला भी कर लिया
जब दिन मिला मुझसे तो बहुत ही उदास था
संग मेरे चलते चलते अंधेरा भी कर लिया
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