तेरे करीब मेरी कोई जुस्तजू नहीं
मुझसे वफ़ा करोगे बहुत आरजू नहीं
किसका भरोसा कर लूँ किसका मैं ऐतबार
तन्हाई में हूं जब से मेरे साथ तू नहीं
मेरा ये आईना खफा रहता है आजकल
कितने दिनों से खुद से कोई गुफ्तगू नहीं
कुछ कम उबाल आ रहा दिल में हमारे
अहसास कम होते रहें ये वो लहू नहीं
नीलाम हो रहे बहुत नायाब नमूने
तय हो कि इसमें हो किसी की आबरू नहीं
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