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जख्मों की सौगात मुझे

                
                                                         
                            तकल्लुफों से परे होना न आया रास उसे
                                                                 
                            
रहूं भी कायदे में,ये कभी जंची न बात मुझे
वो मेरा अपना है करना है फिर से गौर मुझे
दिया करता है शिकवा, जख्मों की सौगात मुझे
आजादी, बेफिक्री, जवां नज़ारों के ख्वाब दिखा
दिया चाहत की बेड़ियाँ, बन्दिशों के हवालात मुझे
बारात तारों की देखते थे जिसके साथ सदा
अक्सर उसी ने छोड़ा भी तन्हा है कई बार मुझे
निगाहें उनसे कभी मैं मिला नहीं सकता
दिया करते हैं जब तानें मेरे हालात मुझे
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2 घंटे पहले

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