दीवारो दर पे ताक पर चिराग जल उठे
दौरे खिजां में भी चमन में फूल खिल उठे
तब्दीलियों ने आ कर मुझसे यही कहा
वो इतना खुश रहा तो न मौसम बदल उठे
आंखों में उसके जैसे हों,प्याले शराब के
गिरता हुआ बिना गिरे हुए सम्हल उठे
मैं उससे दूर हो गया,जज्बात रोककर
सोए हुए अरमान जब मेरे मचल उठे
बेजार हुआ जा रहा था जिंदगी से मैं
आंखों में मेरे जाने कितने ख्वाब पल उठे
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