हौसला करता हूं लेकिन हौसला होता नहीं
चाहकर भी मन हमारा बावला होता नहीं
एक लम्हे को ही गुजरा तू मेरे नजदीक से
दिल किसी भी बात में अब मुब्तिला होता नहीं
मै तेरी चाहत में हूं और तू मेरे बेहद करीब
अब किसी सूरत में कायम सिलसिला होता नहीं
मैं था किस दुनिया का इंसां और कहां आना हुआ
कोई दिलवर मेरे जैसा मनचला होता नहीं
ताक पर रखा हुआ हूं और अटा हूं धूल से
अनपढ़े पन्ने हमारे तब्सिरा होता नहीं
जाते जाते कर रहा है तू सभी हर काम वो
मैं तेरी अहसासों से अब भी रिहा होता नहीं
इसमें कोई शक नहीं है ये नहीं दुनिया मेरी
इसको मेरी है जरूरत मैं कभी भूला नहीं
भूल पाया भी नहीं और याद फिर आने लगी
कहने को करता हूं कोशिश फासला होता नहीं
जाल में फंसा परिंदा फड़फड़ाता है मगर
चाहता है खूब कोई जलजला आता नहीं
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