मुस्कानों पर फिदा होने वाले
न झेल पाओगे अश्कों के सैलाब
न बदलते रहो साथ मौसम के
सब्र से देखते रहो,बदलते अंदाज
जिंदगी के,कभी हमदम के
रहो समंदर होकर
जो झेलकर,हर तूफान
ज्वार, भाटा
समेट लेता है सब कुछ
अपनी गहराइयों में
और खेलने देता है अपनी गोद में
अगणित नावों को
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