मुझपे तेरा इतना असर है
सबकी निगाहें ही मुझ पर हैं
चांदनी फैली है धरती पर
बिजली जैसी उजली डगर है
मैं परदेश में हूं लेकिन मन
रोज पहुंच जाता घर पर है
शोला,कौन है कौन है शबनम
तुझमें मुझमें क्या अन्तर है
तेरी पनाहों में हूं आया मै
तेरा हाथ मेरे सर पर है
कुछ कहना भी शेष नहीं है
जो होता है तेरी नज़र है
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