आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खान-पान

                
                                                         
                            भोजन केवल स्वाद नहीं,
                                                                 
                            
है जीवन का आधार,
सात्त्विक भोजन तन-मन रखता,
नित स्वस्थ और साकार।

माँ के हाथों की रोटी में,
बसता स्नेह महान,
दाल, चटनी, साग-सब्ज़ियाँ,
भर देतीं मुस्कान।

ऋतु के फल और ताज़ी सब्ज़ी,
प्रकृति का वरदान,
जितना सादा भोजन होगा,
उतना स्वस्थ इंसान।

अन्न मिला तो श्रम को मानें,
किसान का सम्मान,
दाने-दाने में श्रम बसता,
दाना नहीं बेईमान।

तेल-मसाले सीमित रखना,
मीठा भी हो कम,
संतुलित भोजन अपनाएँ तो,
खुशियाँ आएँ हरदम।

जल भी जीवन का आधार है,
रखिए इसका ध्यान,
स्वच्छ जल और स्वच्छ भोजन,
स्वस्थ रखे इंसान।

मिल-बाँटकर जब भोजन हो,
बढ़ता प्रेम अपार,
एक थाली में मिल जाते हैं,
छोटे-बड़े परिवार।

भोजन की हम कद्र करें तो,
बचे अन्न का मान,
थाली में उतना ही लें,जो ,
हो नहीं नुकसान।

खान-पान में संयम रखकर,
जीवन हो आसान,
तन स्वस्थ हो,मन प्रसन्न हो—
यही सुखद है खान-पान।

-पंडित अनिल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
10 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर